खेल डेस्क. राजकोट की हेमाली देसाई के क्रिकेट स्कोरिंग के सफर को 25 साल हो गए हैं। वेटरन महिला स्कोरर हेमाली ने 13 मार्च को राजकोट में खत्म हुए सौराष्ट्र और बंगाल के रणजी फाइनल में भी स्कोरिंग की थी। 44 साल की हेमाली बीसीसीआई के स्कोरिंग पैनल में सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (एससीए) की ओर से हैं। वे देश की एकमात्र महिला डकवर्थ-लुईस मैनेजर हैं। हेमाली अपने करियर में अब तक दो टेस्ट, 12 वनडे, तीन इंटरनेशनल टी-20 में स्कोरिंग कर चुकी हैं। इसके अलावा वे कई आईपीएल मैचों और 100 से ज्यादा घरेलू मैच में भी स्कोरिंग कर चुकी हैं।
हरभजन सिंह चौंक गए थे
बात 2015 की है। सौराष्ट्र-पंजाब के बीच रणजी मैच राजकोट में हुआ था। हेमाली और सेजल स्कोरर थीं। हरभजन पंजाब के कप्तान थे। वे पंजाब का स्कोर जानने स्कोरर रूम में पहुंचे, जहां महिला स्कोरर को देख भौंचक्के रह गए।
‘स्टेट पैनल स्कोरर की परीक्षा 1994 में पास की’
हेमाली बताती हैं, ‘1990 से 95 तक स्कूल-कॉलेज में अंडर-16, वेस्ट जोन और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी क्रिकेट टूर्नामेंट खेलने के बाद क्रिकेट में ही आगे बढ़ने की इच्छा थी। स्टेट पैनल स्कोरर की परीक्षा 1994 में पास की। 1997 में बीसीसीआई स्कोरर की परीक्षा पास की। शुरुआती दिनों में लगता था कि मैं बतौर स्कोरर ज्यादा टिक नहीं सकूंगी, लेकिन मैं सफल रही। अपनी इस लगन और चाहत के दम पर 100 से अधिक घरेलू टूर्नामेंट में स्कोरिंग कर चुकी हूं। मुझे 2005-06 में यूरो-एशिया कप के सभी मैचों में बतौर स्कोरर काम करने का मौका मिला था।’
देश में 8 क्वालिफाई महिला स्कोरर
हेमाली कहती हैं, ‘देश में 8 क्वालिफाई महिला स्कोरर हैं। इसमें दो राजकोट से हैं। मैं सबसे सीनियर हूं। मैं और मेरी जूनियर सहयोगी सेजल दवे महेता राजकोट के तमाम इंटरनेशनल और घरेलू मैचों में साथ ही काम करते हैं। स्कोरर की भूमिका के बाद दो साल पहले बीसीसीआई ने मुझे डकवर्थ-लुईस मैनेजर की जिम्मेदारी सौंपी है। डकवर्थ-लुईस मैनेजर के रूप में दो वनडे और 3 टी-20 में सेवा दे चुकी हूं।’
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